नेपाल फ्लैश फ्लड ने नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भारी तबाही मचाई है। इस विनाशकारी आपदा के बाद सैकड़ों परिवार अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार शाम तक 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अलग-अलग सूचियों का मिलान जारी है, इसलिए इस संख्या में बदलाव हो सकता है।
इस मुश्किल घड़ी में राहत की खबर यह है कि तमिलनाडु के 21 भारतीय तीर्थयात्री सुरक्षित दिल्ली लौट आए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हवाई अड्डे पर उनसे मुलाकात की। इसके अलावा तिब्बत की ओर फंसे 96 भारतीय सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन की तरफ मौजूद करीब 400 अन्य भारतीय सुरक्षित हैं और अधिकारियों तथा अपने परिवारों के संपर्क में हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, भारत की प्राथमिकता संपर्क से बाहर नागरिकों का पता लगाना और सुरक्षित लोगों की घर वापसी सुनिश्चित करना है। नेपाल सरकार एवं नेपाली सेना के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
नेपाल में 547 लोगों की मौत, 977 अब भी लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने शुक्रवार को मृतकों की संख्या 538 बताई, जबकि नेपाल पुलिस का ताजा आंकड़ा 547 तक पहुंच गया। करीब 977 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ ये आंकड़े बदल सकते हैं।
बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में सड़कें, पुल, मकान और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित की हैं। कई जगह मोटी कीचड़ और मलबे की परत के कारण बचाव दलों को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है। कुछ इलाके अब भी केवल हेलीकॉप्टर से पहुंचने योग्य बताए जा रहे हैं।
कैसे आई इतनी विनाशकारी बाढ़?
वैज्ञानिकों की शुरुआती पड़ताल में आशंका जताई गई है कि ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने से नदी का रास्ता अस्थायी रूप से बंद हो गया था। पानी जमा होने के बाद प्राकृतिक अवरोध टूटा और तेज रफ्तार पानी व मलबे ने नीचे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि आपदा के सटीक कारणों की जांच अभी जारी है।
अधिकारियों ने ऊपरी इलाके में बनी एक नई झील से दोबारा बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
भारत ने बढ़ाई राहत और बचाव सहायता
भारत नेपाल को राहत सामग्री की अतिरिक्त खेप भेज रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक मेडिकल टीम और सुरंग बचाव की जरूरतों का आकलन करने वाला दल भी भेजा जा रहा है। भारत ने एनडीआरएफ की टीमें, तकनीकी विशेषज्ञ और संपर्क बहाल करने के लिए बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में भारत-नेपाल सीमा से लगे इलाकों को भी सतर्क रखा गया है, क्योंकि बाढ़ का पानी गंडक नदी प्रणाली में नीचे की ओर बढ़ सकता है। भारत सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय स्थानीय प्रशासन की सलाह मानने को कहा है।
भारतीय दूतावास की आपातकालीन हेल्पलाइन
नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों या उनके परिजनों के लिए भारतीय दूतावास ने ये नंबर जारी किए हैं:
- +977 985 131 6807
- +977 970 910 7500
किसी व्यक्ति से संपर्क न हो पाने की स्थिति में सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी साझा करने के बजाय दूतावास या संबंधित सरकारी नियंत्रण कक्ष को उसका नाम, पासपोर्ट विवरण, यात्रा समूह और अंतिम ज्ञात स्थान देना ज्यादा उपयोगी होगा।
यह एक विकसित होती खबर है। आधिकारिक आंकड़े बदलने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा। फीचर इमेज वास्तविक घटनास्थल की तस्वीर नहीं, बल्कि एआई से तैयार किया गया सांकेतिक दृश्य है।




















