
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गुजरात से जुड़े साइबर टेररिज्म मामले में महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और दिल्ली में पांच स्थानों पर तलाशी ली है। आधिकारिक प्रसारण सेवा आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार जांच उन कथित DDoS हमलों से जुड़ी है जिनमें ऑपरेशन सिंदूर की अवधि के दौरान केंद्र सरकार की 54 वेबसाइटों और महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधनों को निशाना बनाया गया था।
DDoS हमला कैसे काम करता है?
Distributed Denial-of-Service यानी DDoS हमले में किसी वेबसाइट या सर्वर पर एक साथ बहुत अधिक नकली ट्रैफिक भेजा जाता है। इससे वास्तविक उपयोगकर्ता सेवा तक नहीं पहुंच पाते। हमले का उद्देश्य डेटा चोरी करना जरूरी नहीं होता; कई मामलों में डिजिटल सेवा को बाधित करना ही लक्ष्य होता है। सरकारी पोर्टल, बैंकिंग सेवाएं, संचार नेटवर्क और आवश्यक सेवाओं से जुड़े सिस्टम इसलिए संवेदनशील माने जाते हैं।
तलाशी में क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने डिजिटल उपकरण और हैकिंग गतिविधियों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। इन वस्तुओं की फोरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित हमलों की तकनीकी संरचना, स्रोत और भूमिका क्या थी। जांच जारी है और अदालत में आरोप सिद्ध होना बाकी है।
भारत के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
आधुनिक संघर्ष केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं हैं। सरकारी वेबसाइटों, ऊर्जा नेटवर्क, संचार व्यवस्था और वित्तीय प्रणालियों पर साइबर हमला रोजमर्रा की सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों को भी बैकअप, ट्रैफिक फिल्टरिंग, घटना प्रतिक्रिया और नियमित सुरक्षा परीक्षण मजबूत करने की आवश्यकता है।
आम उपयोगकर्ताओं को सरकारी पोर्टल बंद मिलने पर सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे अनजान लिंक से बचना चाहिए। संकट के दौरान नकली वेबसाइट और फिशिंग संदेश भी सक्रिय हो सकते हैं। केवल आधिकारिक डोमेन और सत्यापित संचार चैनल का उपयोग करना सबसे सुरक्षित उपाय है।
स्रोत: Akashvani News, NIA















