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11 सप्ताह में 73 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह: आम अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने

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11 सप्ताह में 73 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह: आम अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने
प्रतीकात्मक AI-जनित चित्र

रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत 21 अगस्त तक लगभग 73 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज किया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह राशि 11 सप्ताह से कम समय में जुटी और इसमें 65.40 अरब डॉलर का बड़ा हिस्सा FCNR(B) जमा का रहा। योजना में विदेशी मुद्रा उधार और बाहरी वाणिज्यिक उधार के लिए भी व्यवस्था शामिल है।

FCNR(B) जमा क्या है?

Foreign Currency Non-Resident Bank जमा प्रवासी भारतीयों को विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंक में राशि रखने की सुविधा देता है। जमा विदेशी मुद्रा में होने के कारण जमाकर्ता के लिए रुपये की विनिमय दर का जोखिम सीमित रहता है। विशेष स्वैप सुविधा बैंकों को जुटाई गई विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने की निर्धारित व्यवस्था देती है।

अर्थव्यवस्था को संभावित लाभ

बड़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह देश के बाहरी वित्तीय बफर को मजबूत कर सकता है। इससे बैंकिंग प्रणाली में संसाधन बढ़ते हैं और आयात भुगतान या वैश्विक अस्थिरता के समय विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बेहतर रह सकती है। मजबूत रिजर्व रुपये में अचानक उतार-चढ़ाव से निपटने की क्षमता भी बढ़ाते हैं।

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जोखिम भी समझना जरूरी

यह पैसा स्थायी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के समान नहीं है। जमा और उधार की परिपक्वता अवधि होती है तथा भविष्य में रकम लौटानी पड़ती है। यदि एक ही समय बड़ी राशि बाहर जाती है तो तरलता और विनिमय दर पर दबाव बन सकता है। योजना की लागत, बैंकों की देनदारी और भविष्य की वैश्विक ब्याज दरें भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

इसलिए 73 अरब डॉलर के आंकड़े को अर्थव्यवस्था की अकेली सफलता के रूप में देखने के बजाय बाहरी स्थिरता, ऋण संरचना और वापसी की समय-सारिणी के साथ समझना चाहिए।

स्रोत: Press Information Bureau, Akashvani News

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