नई दिल्ली: दिल्ली की फुटबॉल व्यवस्था को लेकर कई दिनों से बनी अनिश्चितता आखिरकार दूर हो गई। दिल्ली सॉकर एसोसिएशन (डीएसए) की नई टीम का गठन राजधानी के हिन्दी भवन में संपन्न चुनाव प्रक्रिया के बाद हुआ। सुसांता देब ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली है, जबकि मोहम्मद मारूफ खान उपाध्यक्ष और लियाकत अली कोषाध्यक्ष चुने गए हैं। चुनाव की खास बात यह रही कि सभी पदों पर फैसला निर्विरोध हुआ।
पूर्व हाईकोर्ट जज की देखरेख में पूरी हुई प्रक्रिया
चुनाव दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.पी. गर्ग की निगरानी में कराया गया। डीएसए संविधान और अनुसूची-3 के नियमों के आधार पर चली प्रक्रिया में प्रत्येक पद के लिए केवल एक उम्मीदवार सामने आया। इसी वजह से मतपत्र या गुप्त मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और निर्वाचन अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।
अलग-अलग चुनाव तारीखों से बढ़ा था विवाद
इससे पहले एसोसिएशन की आंतरिक खींचतान सार्वजनिक रूप ले चुकी थी। दो पक्षों ने 30 अगस्त और 6 सितंबर की अलग-अलग चुनाव तारीखें घोषित कर दी थीं। इससे क्लबों, पदाधिकारियों और दिल्ली के फुटबॉल से जुड़े लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। अब एक मान्य चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के साथ संगठन को उस टकराव से बाहर निकलने का अवसर मिला है।
ये सदस्य बने नई कार्यकारिणी का हिस्सा
कार्यकारिणी में मृणाल धर, विनोद कुमार, अंकिता कौर धूपिया, प्रो. आभा जैन, सैयद जमाल नासिर, नीतू कक्कड़, मोहम्मद नईम और करण मल्होत्रा को स्थान मिला है। इन सभी का चुनाव भी बिना मुकाबले के हुआ। निर्वाचन अधिकारी ने व्यवस्था बनाए रखने और प्रक्रिया में सहयोग के लिए डीएसए सचिवालय, सदस्य क्लबों तथा उम्मीदवारों को धन्यवाद दिया।
तीन महिला सदस्यों की मौजूदगी बनी अहम पहलू
नई कार्यकारिणी में प्रो. आभा जैन, नीतू कक्कड़ और अंकिता कौर धूपिया शामिल हैं। तीन महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी डीएसए के नए नेतृत्व को अधिक विविध बनाती है। तीनों ने संगठन को विवादों से निकालकर खेल गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्रिय सहयोग देने की बात कही है।
नई शुरुआत का संदेश, लीग पर रहेगा फोकस
नई टीम की ओर से जारी प्रेस बयान में सुसांता देब ने माना कि गुटीय संघर्ष के दौरान डीएसए का महत्वपूर्ण समय नष्ट हुआ। उन्होंने कहा कि अब लीग मुकाबलों को बिना और देरी के शुरू करना जरूरी है। नई कार्यकारिणी का लक्ष्य दिल्ली फुटबॉल को राजनीति और आपसी खेमेबाजी से दूर रखते हुए आगे बढ़ाना होगा।
देब के अनुसार नई टीम में अनुभव के साथ युवा सोच भी मौजूद है। नेतृत्व ने यह संदेश भी दिया है कि अनुशासनहीनता और किसी तरह के पक्षपात को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस रुख की असली परीक्षा लीग कार्यक्रम, क्लबों से संवाद और खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करने में होगी।
दिल्ली फुटबॉल को अब नतीजों का इंतजार
चुनाव पूरा होना डीएसए के लिए प्रशासनिक स्थिरता की पहली सीढ़ी है। अब नई टीम के सामने कैलेंडर को व्यवस्थित करने, लंबित मुकाबलों को शुरू कराने और क्लबों का विश्वास वापस जीतने की चुनौती है। फुटबॉल समुदाय की उम्मीद होगी कि निर्विरोध चुना गया नेतृत्व आपसी सहमति को मैदान पर ठोस फैसलों में बदले और राजधानी के खिलाड़ियों को नियमित अवसर उपलब्ध कराए।




















