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देश के 35 प्रतिशत क्षेत्र में बारिश की कमी: मानसून का असमान असर

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देश के 35 प्रतिशत क्षेत्र में बारिश की कमी: मानसून का असमान असर
प्रतीकात्मक AI-जनित चित्र

दक्षिण-पश्चिम मानसून के अंतिम चरण से पहले देश के लगभग 35 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में उल्लेखनीय बारिश की कमी दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 412 जिले इस श्रेणी में हैं। एक जून से 25 अगस्त तक देशभर की वर्षा सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम बताई गई।

एक ही राज्य में बाढ़ और कमी कैसे?

मानसून का कुल आंकड़ा स्थानीय तस्वीर पूरी तरह नहीं दिखाता। कुछ दिनों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ आ सकती है, जबकि लंबे सूखे अंतराल के कारण पूरे मौसम का संचयी आंकड़ा सामान्य से कम रह सकता है। असम में हाल की बाढ़ के बावजूद 35 में से 19 जिलों में वर्षा की कमी दर्ज होना इसी असमानता को दर्शाता है।

खेती पर संभावित असर

फसल पर प्रभाव केवल कुल बारिश से तय नहीं होता। बुवाई, अंकुरण और फूल आने के समय पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। लंबे dry spell से मिट्टी की नमी घट सकती है, जबकि अचानक भारी बारिश फसल और मिट्टी दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। सिंचाई वाले क्षेत्रों की तुलना में वर्षा-आधारित खेती अधिक संवेदनशील रहती है।

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आने वाले दिनों का मौसम

पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधि बनी रहने का पूर्वानुमान है। लेकिन स्थानीय चेतावनी तेजी से बदल सकती है। नागरिकों और किसानों को जिलेवार IMD बुलेटिन, राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और कृषि सलाह सेवाओं की जानकारी देखनी चाहिए।

बारिश की कमी का आकलन करते समय जलाशय स्तर, भूजल, मिट्टी की नमी और फसल की स्थिति को भी साथ देखना आवश्यक है। केवल राष्ट्रीय प्रतिशत से स्थानीय संकट या राहत का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

स्रोत: The Indian Express, IMD Climate Research Services

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